वर्तमान में शिक्षकों के सकारात्मक समुदाय की आवश्यकता क्यों है?

किसी भी देश की उन्नति का आधार वहां के शिक्षक हैं जो अपने ज्ञान के प्रकाश से किसी भी समुदाय को अंधकार से निकाल सकते हैं| ऐसे ही राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक कन्या विद्यालय नं १ नजफगढ़(दिल्ली) की शिक्षिका अनीता पंडिता हमें शिक्षकों के महत्व और उनकी उपयोगिता के बारे में बता रही हैं|

शीर्षक को ध्यान में रखते हुए मेरे मन में अनेक विचार उत्पन्न हो रहे हैं जिनका निष्कर्ष मैं निम्नलिखित विचारों के आधार पर दे रही हूँ, आशा करती हूँ कि मेरा प्रयास सफल हो।

आज के समय में शिक्षक समुदाय जहाँ रोज़ नई-नई चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार हैं वहीँ कभी-कभी थोड़ा बहुत तनाव उसकी राह में बाधा का कारण बन जाता है, जिस कारण नकारात्मक प्रभाव उसे अपनी ओर आकर्षित करने को हर कदम पर तैयार रहते हैं वह कितना भी इससे  निकलने की कोशिश करें तो भी वह उसमें और ज्यादा उलझता जाता है|आज दूर-दूर तक जितने भी शिक्षक समुदाय देखने को मिलते हैं, हर समय न जाने कहाँ खोये होते हैं,न दिन का चैन न रात का आराम और प्रत्येक समय इन्हीं बातों से तनाव में रहने के कारण अनेक रोगों से वे ग्रस्त हो जाते हैं।अब यदि हमारे देश के भविष्य का निर्माण करने वाला यह शिक्षक समुदाय नकारात्मकता की तरफ बढ़ेगा तो सोचिए देश का क्या होगा |अतः हमारा यह प्रयास रहना चाहिए कि अपने चारों ओर सकारात्मकता बनाए रखें|… |अपने कर्तव्य का पालन करें, दृढ़ निश्चयी बनें और नकारात्मकता की तरफ बढ़ने के बजाय सामाजिक विकास में अपनी पूरी भागीदारी दें |

“एक अकेला इंसान सब कुछ नहीं कर सकता”, उसी तरह से एक अकेला सकारात्मक शिक्षक इतने बड़े उत्तरदायित्व को संभाल नहीं सकता |  सकारात्मक शिक्षक, वर्तमान समुदाय की आवश्यकता हैं जो पूर्ण रूप से अपना शत प्रतिशत योगदान दें।देश-भक्ति केवल देश के लिये प्राण अर्पण करना ही नहीं है, अपितु वह हर कार्य जो देश की प्रगति को ध्यान में रखते हुए किया जाए वह भी देश-भक्ति ही हैं।आज देश जैसी भी स्थिति में हैं उसमें शिक्षक समुदाय ही ऐसा हैं जो किसी को राह दिखा सकता है| देश के भविष्य कहे जाने वाले छात्र/छात्राओं के माध्यम से वह ऐसा वातावरण तैयार कर सकता हैं जो सकारात्मक उर्जा से परिपूर्ण हो| जहाँ शिक्षक और शिक्षार्थी दोनों ही अपना सही योगदान दे सकें पर इसके लिए शिक्षक समुदाय को ऐसी नींव बनानी होगी  जो देश की कमज़ोर पड़ चुकी व्यवस्था को बल प्रदान करने में सहायक हो ,जहाँ गुरु और शिष्य में कोई भेदभाव न हो,जहाँ का माहौल मैत्रीपूर्ण संबंधों से परिपूर्ण हो और जहाँ अपनी- अपनी योग्यता के आधार पर हर किसी का मूल्यांकन हो|

विषय चाहे कोई भी हो हर विषय को समान रूप से महत्व दिया जाये…ऐसा न हो कि अंग्रेजी विषय और अंग्रेजी पढ़ने वाले को अधिक से अधिक महत्व दिया जाये और दूसरी भाषा पढ़ने वालों को कम आंका जाये जो कि .नकारात्मक का प्रभाव बढ़ने का कारण होता है |….अपने स्वयं के अनुभवों से बता रही हूँ, मैं हिन्दी पढ़ाती हूँ परन्तु में स्वयं कई बार ऐसी परिस्थितियों से गुजरी हुई हूँ कि कभी कभार सोचने पर मजबूर होती थी कि क्या हिन्दी पठन पाठन सच में समय का दुरुपयोग है, पर मैंने अपने मन को समझाया कि वास्तव में मेरी हिन्दी भाषा के समान संसार में कुछ नहीं और यह मानिये कि जब भी कक्षा में पढ़ाती हूँ तो केवल और केवल अपनी भाषा में ही अपने विचार प्रकट करती हूँ और मेरी छात्राएँ भी मेरे इस कार्य में बढ़ चढ़कर अपना योगदान देती हैं।मेरा उद्देश्य अपने विषय का प्रचार-प्रसार करना नहीं अपितु सकारात्मक सोच बढ़ाने के लिए अपना योगदान देना है जिससे अपने गौरवशाली राष्ट्र की उन्नति हो सकें।

आज राष्ट्र की उन्नति हर भारतीय नागरिक का मुख्य आधार हैं…चाहे वह किसी भी व्यवसाय से जुड़े हो…हर कोई अपनी तरह से यह प्रयास करता है कि देश उन्नति करें …जहाँ कुछ लोग भ्रष्टाचार करके गलत नीतियों को बढ़ावा देकर देश की व्यवस्था को ख़राब करने में कोई कसर नहीं रखते, वहीँ कितने  लोग ऐसे भी हैं जो रात दिन केवल देश को उन्नत बनाने के लिए तन-मन अर्पण करने को तैयार होते हैं।बेशक ऐसे लोग गिनती में कम हैं पर देश को विकासशील बनाने के लिए वह अपनी तरफ से कोई कसर नहीं छोड़ते।

तो हम यह तो मान लें कि एक ऐसा काम जो देश को बेहतरीन कल,व्यवस्थित सत्ता ,विकासशील संपदाओं से युक्त देश और बेहतरीन योग्य शासक वर्ग दे सकता है वह केवल और केवल शिक्षक समुदाय ही हैं जो भविष्यवक्ता हैं और  जो सकारात्मक उर्जा से परिपूर्ण है | जो सही मार्गदर्शन करने में सक्षम हैं, जो कुंभकार की तरह अपने हाथों से बेहतर आकार देकर योग्य शिष्य रूपी मटकों का आविष्कार करता है।ये मटके रूपी शिष्य जब देश में सही स्थान पाते हैं तो देश की उन्नति में चार चांद लग जाते हैं….

आज जब देश का यह वर्ग आए दिन की थकान और तनाव से परेशांन हैं तो हमें सकारात्मकता को बढाकर इनका मार्ग दर्शन करने का प्रयास करना चाहिए।क्योंकि शिक्षा को वास्तविक स्वरूप प्रदान करने वाले यही तो असली शिक्षक हैं।अगर इनमें से एक भी कमज़ोर  पड़ जाये तो संपूर्ण शिक्षक समुदाय कमज़ोर हो सकता हैं| अतः सकारात्मक शिक्षक समुदाय हमारे समाज की आवश्यकता और वर्त्तमान समय की मांग भी हैं।हमारा सदैव यही प्रयास रहना चाहिए कि हम शिक्षक समुदाय, चाहे कैसी भी परिस्थिति हो सकारात्मकता के साथ उस परिस्थिति का सामना कर अपने ज्ञान की रोशनी से अंधकार रुपी नकारात्मकता को खत्म करें |।स्मरण रहे कि शिक्षक समुदाय वह है जो किसी भी व्यक्ति को अँधेरे रास्तों से निकालकर उन्हें शिक्षा का ज्ञान प्रदान कर प्रकाश की ओर ले जा सकता है|

 

एक स्वरचित कविता सकारात्मक शिक्षक समुदाय के नाम:

“गुणवत्ता की परख जो करता

देश की अस्मिता का पालन करता

नये नये संसाधनों की खोज जो करता

राष्ट्र को जो विकसित करता

तप बल के जोर से परिवर्तन करता

स्वाध्याय का धर्म निभाता

राष्ट्र प्रहरी जो कहलाता

शिक्षक समुदाय का गौरव बढ़ाता

सच्चा देशभक्त वही कहलाता

मान सम्मान की वेदी पर

अपने को वह सदा जलाता

स्नेह का बंधन बना बनाकर

कोयलों की खदान से हीरे तराशकर

देश की मिट्टी को महकाता

साहस बल की पराकाष्ठा की बातें

जो नित नित स्वयं रचाते

सकारात्मक सोच बढ़ाने के लिए

शत प्रतिशत योगदान वह देता

नमन करूँ मैं उस शिक्षक को

जो नित नया संसार रचाते|

 

अनीता पंडिता

प्रवक्ता हिन्दी

विद्यालय: राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक कन्या विद्यालय नं १

नजफगढ़

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